अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए हथियार भेजने का प्रयास किया गया था। उनके अनुसार ये हथियार कुर्द समूहों के माध्यम से पहुंचाए जाने थे, लेकिन वे कथित रूप से प्रदर्शनकारियों तक नहीं पहुंच सके और रास्ते में ही रोक लिए गए।
ट्रंप का कहना था कि उस समय ईरान में आर्थिक समस्याओं और महंगाई के कारण व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। उनका दावा है कि अमेरिका उन लोगों का समर्थन करना चाहता था जो सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
हालांकि इस दावे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि कुर्द पक्ष ने ऐसे किसी हथियार हस्तांतरण की जानकारी से इनकार किया है। इस वजह से ट्रंप के बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि ईरानी प्रशासन ने विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सख्त कार्रवाई की, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई। हालांकि इस संबंध में अलग-अलग स्रोतों के आंकड़े भिन्न बताए जाते हैं और सटीक संख्या को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया क्षेत्र में पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है और अमेरिका तथा ईरान के बीच संबंध संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे माहौल में इस तरह के दावों ने क्षेत्रीय राजनीति को और चर्चा में ला दिया है।
