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नई दिल्ली | OPD News

देश के युवाओं को रोजगार के लिए कौशल प्रशिक्षण देने वाली केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के क्रियान्वयन पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संसद में 18 दिसंबर 2025 को पेश की गई CAG की Performance Audit Report No. 20 of 2025 में योजना के पहले तीन चरणों यानी PMKVY 1.0, 2.0 और 3.0 की समीक्षा की गई है।

CAG के मुताबिक वर्ष 2015 से 2022 के बीच PMKVY के तीन चरणों के लिए करीब ₹14,449 करोड़ का कुल प्रावधान था। इसमें से ₹10,194 करोड़ जारी किए गए और ₹9,261 करोड़ खर्च हुए। इस दौरान 1.32 करोड़ उम्मीदवारों को प्रशिक्षण/प्रमाणन देने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि 1.10 करोड़ उम्मीदवार प्रमाणित हुए।

प्रशिक्षण और बाजार की जरूरत में तालमेल पर सवाल

CAG ने पाया कि PMKVY के तहत प्रशिक्षण को वास्तविक रोजगार बाजार की जरूरतों के साथ पर्याप्त रूप से नहीं जोड़ा गया। रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय स्तर पर किस क्षेत्र में किस प्रकार के कुशल मानव संसाधन की जरूरत है, इसकी पर्याप्त micro-level skill-gap information उपलब्ध नहीं थी। साथ ही योजना के लिए दीर्घकालिक रणनीति और National Skill Development Plan की कमी भी सामने आई। कई क्षेत्रों और राज्यों में दिए गए प्रशिक्षण skill-gap studies के अनुरूप नहीं पाए गए।

1.10 करोड़ प्रमाणित, लेकिन प्लेसमेंट सिर्फ 41 प्रतिशत

रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जुड़ा है। CAG के विश्लेषण के अनुसार Short-Term Training और Special Project के तहत प्रमाणित 56.14 लाख उम्मीदवारों में से केवल 23.18 लाख यानी करीब 41 प्रतिशत उम्मीदवारों के placement का रिकॉर्ड मिला। केरल में कुछ Training Partners द्वारा placement के प्रमाण के तौर पर गलत दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की बात भी ऑडिट में सामने आई।

इससे सवाल उठता है कि केवल प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र देने के बजाय क्या योजना युवाओं को स्थायी और गुणवत्तापूर्ण रोजगार दिलाने के अपने मूल उद्देश्य को पर्याप्त रूप से हासिल कर पाई?

डेटा और निगरानी व्यवस्था में भी खामियां

CAG ने PMKVY के IT और data management framework में भी कमजोरियां चिन्हित की हैं। ऑडिट के मुताबिक प्रशिक्षण के फोटो/वीडियो प्रमाण, उम्मीदवारों की शिक्षा और कार्य अनुभव जैसी महत्वपूर्ण सूचनाओं को सुरक्षित रखने की स्पष्ट नीति नहीं थी। Trainers, Assessors और Candidates की पहचान, संपर्क और बैंक संबंधी विवरणों पर भी नियंत्रण पर्याप्त प्रभावी नहीं पाया गया।

इसके अलावा कुछ मामलों में निर्धारित उम्र, शिक्षा और कार्य अनुभव की पात्रता को नजरअंदाज कर उम्मीदवारों का नामांकन किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। लक्षित लाभार्थियों जैसे बेरोजगार युवाओं और स्कूल/कॉलेज ड्रॉपआउट की पहचान और सत्यापन की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं थी।

फंड प्रबंधन पर भी CAG की आपत्ति

वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी कई टिप्पणियां की गई हैं। CAG के अनुसार केंद्रीय घटक की ₹222.63 करोड़ की धनराशि के अनुमान और हस्तांतरण में गड़बड़ी/देरी से Consolidated Fund of India पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। ऑडिट के बाद NSDC द्वारा रखे गए ₹12.16 करोड़ के ब्याज की वसूली की गई। PMKVY 1.0 के संबंध में NSDC द्वारा मंत्रालय से ₹24.13 करोड़ के अतिरिक्त administrative expenses वसूल किए जाने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई।

CAG ने दिए सुधार के सुझाव

CAG ने सरकार से प्रशिक्षण को वास्तविक job-market demand से जोड़ने, National Skill Development Plan को जल्द तैयार करने, केंद्र और राज्यों की योजनाओं में बेहतर convergence स्थापित करने तथा IT controls को मजबूत करने की सिफारिश की है। साथ ही लाभार्थियों की पात्रता का सख्ती से सत्यापन, post-training assessment की निगरानी और placement के बाद tracking को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।

सरकार ने ऑडिट के जवाब में बताया कि PMKVY के चौथे चरण में Aadhaar-authenticated e-KYC और Skill India Digital Hub के माध्यम से certification के बाद एक वर्ष तक tracking जैसी व्यवस्थाएं शुरू की गई हैं। हालांकि CAG की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि पहले तीन चरणों में योजना के planning, monitoring, data management, financial control और placement mechanism में कई महत्वपूर्ण कमियां थीं।

OPD News की पड़ताल का बड़ा सवाल यही है जब करोड़ों युवाओं को कौशल प्रमाणपत्र दिया गया, तो क्या उतनी ही मजबूती से उन्हें स्थायी रोजगार से जोड़ा गया? CAG की रिपोर्ट इस सवाल का जवाब तलाशने की जरूरत को और गंभीर बना देती है।

स्रोत: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), Performance Audit Report No. 20 of 2025. CAG की पूरी रिपोर्ट पढ़ें


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