झारखंड विधानसभा तक पहुँचे छात्र आखिर माँग क्या रहे थे ? नौकरी, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और अपने भविष्य पर जवाब। लोकतंत्र का दावा करने वाली झारखंड सरकार के लिए छात्रों के प्रश्न इतने खतरनाक हो गए कि उत्तर देने के बजाय लाठियाँ चलानी पड़ीं ?
कांग्रेस हो, JMM हो या कोई भी अन्य दल, सत्ता में आने के बाद राजनीतिक दलों का चरित्र बदल जाता है। विपक्ष में रहते हुए वही लाठी लोकतंत्र-विरोधी लगती है, सत्ता में आते ही वही लाठी अचानक “कानून-व्यवस्था की मजबूरी” बन जाती है। कभी-कभी लाठीचार्ज प्रदर्शन को समाप्त नहीं करता, वह असंतोष को और गहरा कर देता है।
शान्तिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जिन निहत्थे छात्र-छात्राओं के सिर फूटे, जिनके हाथ टूटे और जिन पर लाठियाँ बरसीं, कल वही मतदान केन्द्र की कतार में खड़े होंगे। लोकतंत्र की सबसे बड़ी भूल यही होती है कि सत्ता आज के प्रदर्शनकारी को देखकर कल के मतदाता को भूल जाती है।
वाह रे लोकतंत्र
लेखन- गगन शर्मा जी
